Types of Memory in Computer कंप्यूटर में मेमोरी के प्रकार

आज जानेंगे Types of Memory के बारे में। Processor के बाद कंप्यूटर का दूसरा महत्त्वपूर्ण भाग मेमोरी है।

हम कंप्यूटर में जो भी कार्य करते हैं अगर उसे हार्डडिस्क में सेव नहीं भी करते हैं।

तो भी हमारे द्वारा किया गया काम कंप्यूटर में उस वक़्त तक रहता है। जबतक कि कंप्यूटर शटडाउन न करदें।

क्योंकि कंप्यूटर हमारे इस काम को अपनी मेमोरी में सेव कर लेता है।

हमारे द्वारा किये जा रहे काम के अतिरिक्त प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर जिसके जरिये काम हो रहा हो वह भी मेमोरी में ही सेव होता है।

काम के दौरान अगर कंप्यूटर की मेमोरी कम पड़ जाए तो कंप्यूटर हमारे द्वारा किये काम का कुछ हिस्सा हार्ड डिस्क में भेज देता है।

और ज़रूरत के मोताबिक दोबारा वहां से मेमोरी में वापस लाता है।

ध्यान रहे कि हार्ड डिस्क मेमोरी के मोकाबले काफी तेज गति से काम करती है।

तथा कंप्यूटर की मेमेरी कम हो तो कंप्यूटर की स्पीड कम हो जाती है।

मेमेरी ज़्यादा होने पर कंप्यूटर बहुत फ़ास्ट काम करता है। Two Types of Memory मेमोरी दो तरह कि होती है। 

Types of Memory

(1) Primary Memory प्रिराइमरी मेमोरी – Types of Memory

इसे मेन मेमोरी, (Main Memory) इंटरनल मेमोरी (Internal memory) और रैम (RAM) भी कहते है।

यह डेटा और प्रोग्राम को कंप्यूटर में प्रोसेसिंग के लिए भेजती है और प्राप्त किये गए परिणाम को हार्ड डिस्क में जमा करती है।

Types of Memory

(2) Secondary Memory – Types of Memory

Types of Memory में सेकंडरी मेमोरी असल में स्टोरेज डिवाइस को ही कहा जाता है।

जिसमे डेटा और जानकारी को सुरक्षित रखा जाता है। यह कई प्रकार कि होती है।

जैसे – हार्ड डिस्क, फलोपी डिस्क, कॉम्पैक्ट डिस्क, मैग्नेटिक ड्रम, पेन ड्राइव, मेमरी कार्ड आदि Types of Memory है।

Hard Disk :- हार्ड डिस्क कंप्यूटर के लिए बहुत ज़रूरी है। आजकल के कंप्यूटर हार्ड डिस्क के बगैर नही चल सकते।

क्योंकि सारा डेटा और प्रोग्राम और ऑपरेटिंग सिस्टम हार्ड डिस्क में ही स्टोर होता है।

हार्ड डिस्क नही होगी तो हम कोई भी प्रोग्राम नही चला पाएंगे। आजकल सभी कंप्यूटर और लैपटॉप में हार्ड डिस्क लगी होती है।

जो प्राइमरी स्टोरेज डिवाइस के तौर पर इस्तेमाल होती है।

CD ROM (Compact Disk Read Only Memory)

ये एक पोर्टेबल स्टोरेज मीडिया है इसकी साइज 4.75 इंच और 0.05 इंच से भी कम होती है।

CD पर डेटा प्रोग्राम तथा दूसरी महत्तवर्ण जानकारियां सेव रहती हैं। CD में डेटा पहले से रिकॉर्ड होकर मिलता है।

और अगर आप Blank CD लेते हैं तो आप उसमे अपनी मनपसंद के प्रोग्राम तथा फ़ाइल रख सकते हैं।

इस मे एकबार जो भी डेटा स्टोर होता है फिर वह दोबारा डिलीट नही होता है।

DVD ROM Digital Versatial Disk Read Only Memory)

एक CD पर 700 MB के डेटा स्टोर कर सकते हैं लेकिन बहुत से ऐसे सॉफ्टवेयर हैं।

जिनके लिए इससे अधिक मैमोरी की आवश्यकता पड़ती है। तो ऐसी हालत में आप DVD का इस्तेमाल कर सकते है।

जिसमे 4GB से लेकर 16 GB तक डेटा स्टोर कर सकते हैं।

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